इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब शारदीय नवरात्र में गरबा पांडाल नहीं सजाए गए हैं। काेराेना काे देखते हुए मंडलों ने इस बार गरबा आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। गुजरात से सटे हमारे जिले में 200 से अधिक जगहों पर छोटे-बड़े गरबा आयोजन होते हैं और पूरे नौ दिन तक खिलैया मां शक्ति की उपासना के साथ गुजराती संस्कृति से सरोबार होकर गरबा नृत्य करते हैं।जिले के बड़े गरबा स्थल सिरोही के रामझरोखा समेत आबूरोड रीको, माउंट आबू गोरा छपरा, शिवगंज गोकुलवाडी और जावाल सांचीयाव माता मंदिर के गरबा मंडलों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कोरोना संक्रमणकाल को देखते हुए इस बार गरबा
आयोजन नहीं किया जा रहा। सिरोही शहर के रामझरोखा मैदान में 48 साल में पहली बार गरबा आयोजन नहीं होगा। घट स्थापना होगी। छोटे स्वरूप में अस्थाई मंदिर में छोटी मूर्ति विराजित होगी और श्रद्धालुओं को दूर से दर्शन वंदन के लिए मास्क व सोशल डिस्टेंस की पालना करनी होगी।
सिरोही रामझरोखा में नवरात्रा के नौ दिन होगी केवल आरती
जिले के सबसे बड़े व पुराने गरबा स्थल रामझरोखा मैदान में इस बार गरबा आयोजन नहीं होगा। कोरोना संक्रमणकाल के बीच इस बार गरबा आयोजन सहित विशाल गरबा पांडाल नही बनाकर विधि-विधान से प्रतिमा स्थापित करके नौ दिन पूजा-अर्चना व आरती ही होगी। सोशल डिस्टेंस व मास्क लगाकर श्रद्धालु मां नवदुर्गा के दर्शन कर सकेंगे। गरबा मंडल के संरक्षक लोकेश खंडेलवाल ने बताया कि 1973 में शंकरपुरी महाराज के सानिध्य में जगदंबे गरबा मंडल की स्थापना हुई थी और पहला गरबा आयोजन राजमाता धर्मशाला के पास हनुमान मंदिर के सामने हुआ था। इसके बाद से रामझरोखा मैदान में आयोजन किया जा रहा है। आयोजन पर करीब 8 लाख रुपए खर्च होते हैं। उदयपुर व अहमदाबाद से मां नवदुर्गा की मूर्ति बनवाई जाती है।
शिवगंज. दादावाड़ी में 40 साल पहले शुरू हुए थे गरबा, इस बार सिर्फ आरती
शिवगंज शहर के गोकुलवाड़ी माेहल्ले में 40 वर्ष पहले गरबा का आगाज हुआ था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण गरबा मंडल ने आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। गरबा मंडल के अध्यक्ष सिद्धार्थ गहलोत ने बताया कि गोकुलवाड़ी माेहल्ला स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले चौक में गरबा का आयोजन किया जाता है। इसमें हर वर्ष करीब सवा लाख रुपए खर्च होते हैं। अंबे माता मंदिर ट्रस्ट शिवगंज के उपाध्यक्ष धनराज गहलोत ने बताया कि इस बार सिर्फ मंदिर को सजाया जाएगा और सुबह-शाम आरती होगी।
आबूरोड : रीको कॉलोनी: में 15 साल से हो रहा गरबा, इस बार घट स्थापना
आबूरोड शहर का सबसे बड़ा गरबा आयोजन रीको कॉलोनी में आबू वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में 15 साल से किया जा रहा है, लेकिन इस बार नहीं होगा। अध्यक्ष शांति भाई पटेल ने बताया कि गरबा स्थल पर 1000 लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है। महोत्सव को आकर्षक बनाने के लिए गुजरात से पार्टी बुलवाई जाती है। इसमें 8 लाख रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं। सोसायटी सदस्यों ने कोरोना प्रभाव को देखते हुए इस बार आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। केवल घट स्थापना और सुबह-शाम पूजा पाठ सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होगा।
आबूरोड शहर का सबसे बड़ा गरबा आयोजन रीको कॉलोनी में आबू वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में 15 साल से किया जा रहा है, लेकिन इस बार नहीं होगा। अध्यक्ष शांति भाई पटेल ने बताया कि गरबा स्थल पर 1000 लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है। महोत्सव को आकर्षक बनाने के लिए गुजरात से पार्टी बुलवाई जाती है। इसमें 8 लाख रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं। सोसायटी सदस्यों ने कोरोना प्रभाव को देखते हुए इस बार आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। केवल घट स्थापना और सुबह-शाम पूजा पाठ सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होगा।
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