काेराेना काल में नवरात्र शुरू हाे गए, लेकिन ऐसा पहला माैका है कि शारदीय नवरात्र में शहर में दुर्गा पांडाल नहीं लग पाए हैं। लाेगाें ने माता की मूर्ति स्थापना घर-घर में की। सभी श्रद्धालुअाें ने सुबह अपने घराें पर दुर्गा की पूजा अर्चना कर उपवास व व्रत की शुरुआत की। मंदिराें में सुबह से श्रद्धालुओं का आना लग गया था। लाेगाें ने साेशल डिस्टेंसिंग के साथ माता के दर्शन किए। वहीं बाजाराें में भी पहले दिन से ही खरीदारी देखी गई। लाेगाें ने पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि याेग के चलते शुभ मुहूर्त में खरीदारी की।
शहर में सुबह के मुहूर्त 6.31 बजे के बाद से दुर्गा माता की मूर्ति की स्थापना शुरू कर दी गई। घरों में महिलाओं ने साफ सफाई करके और घी अर्घ्य दिया। वहीं मंदिराें में माता का अभिषेक कर विशेष शृंगार किया गया। दाढ़देवी माता मंदिर पर देवस्थान विभाग की ओर से साेशल डिस्टेंसिंग के लिए गाेले करवा गए थे।
वहीं मंदिर की घंटियां भी खाेल कर रखी थी। इससे काेई घंटियाें के हाथ नहीं लगा पाए। सुबह से शाम तक वहां दर्शन के लिए श्रद्धाुलु आते रहे। वहीं करणी माता नांता और बिजासन माता मंदिर कुन्हाड़ी, आशापुरा माता मंदिर किशाेरपुरा, ज्याेति मंदिर दादाबाड़ी, जगतमाता मंदिर में माता का विशेष शृंगार कर पूजा-अर्चना की गई।
रामचरितमानस का पाठ शुरू सिंधी कॉलोनी स्थित छोटे बालाजी मंदिर गोपालधाम पर शनिवार सुबह 9 बजे नवरात्रा स्थापना पर रामचरित मानस का अखंड पाठ शुरू हुआ। मंदिर सेवादार गोपाल आजाद ने बताया कि यह पाठ 24 काे समाप्त हाेगा। श्री वैष्णो देवी ज्योति मंदिर पर नवरात्र स्थापना पर भक्तों के लिए दर्शन खोल दिए गए। मंदिर प्रबंधक सनमीत सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सरकारी गाइडलाइन के अनुसार दर्शन कराए जा रहे हैं। इस दौरान प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती और रामचरित मानस का पाठ कर महाआरती की जा रही है।
निगम अधिकारियों ने की आशापुरा माताजी की पूजा
कोरोना के चलते दशहरा मेला के आयोजन निरस्त हो गए हैं। लेकिन, निगम द्वारा हर साल की जाने वाली आशापुरा माता की पूजा की धार्मिक परम्परा का शनिवार को नवरात्रा स्थापना के मौके पर निर्वहन किया गया। आयुक्त वासुदेव मालावत व कीर्ति राठौड़ ने विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की।
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