राज्य सरकार ने प्रदेश की नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिकाओं के मेयर व सभापति पद पर आरक्षण लॉटरी से देना तय किया है। यह जानकारी राज्य सरकार ने मेयर व सभापतियों को आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट में दायर किए जवाब में दी है। राज्य सरकार ने जवाब में कहा है साल 1999 में मेयर व सभापति के पदों पर आरक्षण की रोटेशन से चली आ रही व्यवस्था को 13 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर भूतलक्षी प्रभाव से खत्म कर दिया है। साथ ही नियम 6 को भी संशोधित कर मेयर व सभापति पद पर आरक्षण में लॉटरी का प्रावधान कर दिया है।
आरक्षण की इस व्यवस्था को हर जनगणना के बाद नए सिरे से पुन: शुरू किया जाएगा, जबकि प्रार्थी कमल राठौड़ की ओर से भी अदालत में प्रार्थना पत्र दायर कर कहा है कि सरकार का ऐसा करना मनमानी है। मामले में अब 19 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
दरअसल याचिका में कहा था निकाय चुनाव में एससी-एसटी वर्ग की जनसंख्या व रोस्टर के अनुसार बारी-बारी से मेयर व सभापति के पद आरक्षित रखे जाने चाहिए थे, लेकिन राजनीतिक कारण से इनका आरक्षण हर चुनाव में कुछ ही सीट तक सीमित कर दिया जाता है। इससे न तो इन चुनिंदा सीटों पर कभी सामान्य वर्ग का उम्मीदवार आता है और न दूसरी सीटों पर आरक्षित वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलता है।
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