कहने को तो बाड़ी सामान्य चिकित्सालय जिले में दूसरे नंबर पर सुविधाएं रखने वाला अस्पताल है। यहां 150 बेड की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन हालात यह है कि न तो यहां मोर्चरी में स्वीपर है और न ही अस्पताल में इतना स्टाफ कि अस्पताल में आने वाले मरीज अपना सामान्य इलाज भी ठीक तरह से करवा सकें।
यदि कोई इमरजेंसी अथवा एक्सीडेंट का केस अस्पताल में आता है तो उसे भी अटैंड करने के लिए स्टाफ पूरा नहीं होता। ऐसे में यहां पदस्थ चिकित्सक उसे जिला मुख्यालय के लिए रैफर कर देते हैं। कुछ ऐसा ही मामला शुक्रवार को देखने को मिला। जहां सुबह करीब 11 बजे एक बाइक एक्सीडेंट में एक महिला तथा एक पुरुष के गंभीर रूप से घायल होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस दौरान उनको अटैंड करने न तो कोई स्टाफकर्मी आया और न ही डॉक्टर। इस दौरान खून ज्यादा बहने के कारण परिजनों ने बरामदे में ही उनकी मरहम पट्टी की। इसके बाद वहां पहुंचे डॉक्टर ने उन्हें रैफर कर दिया। मोर्चरी में नहीं है सफाई कर्मी : अस्पताल के हालात इतने खराब हैं कि मोर्चरी की सफाई व्यवस्था के लिए कोई भी कर्मचारी नहीं है।
ऐसे में पोस्टमार्टम के बाद यहां दो से तीन दिन तक गंदगी पड़ी रहती है। अतिआपात स्थिति होने पर अस्पताल प्रशासन द्वारा नगरपालिका से स्वीपर बुलवाकर सफाई कराई जाती है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में स्वीपर सहित अस्पताल में कई पद रिक्त चल रहे हैं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3o0DSWo

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें